Tum Nastik Kyon Rahe Bhagat Singh!
Description
‘तुम नास्तिक क्यों रहे भगत सिंह!’ से उद्धृत
महापुरुषों के साथ हमेशा एक विडम्बना रही है कि उन्हें उनके बाद एक तस्वीर बना दिया जाता है। तसवीरों के साथ एक समस्या ये रहती है कि उन्हें दीवार पर टांगा जाता है और वो जानने से ज्यादा देखने की चीज हो जाते हैं। एक और बड़ी समस्या ये है कि इन तसवीरों के पीछे अक्सर आपको छिपकलियाँ मिलेंगी।
भारत में माने गए हर-एक महापुरुष के साथ ये सत्य है कि आज उनकी तस्वीर के पीछे झुंड की झुंड छिपकलियाँ छिपी हुई हैं। जो तस्वीर जितनी बड़ी होती है उसके पीछे छिपे छिपकलियों के झुंड उतने बड़े होते हैं।
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