Katra-Katra Aasakti: कतरा-कतरा आसक्ति
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ISBN 978-9334487398 (ISBN Edition: E-Book 2026)
- ISBN 9788193827130 (First Published Digitally/Paperback 2018)
- टाईटल : एडिशन: ई-बुक: कतरा-कतरा आसक्ति
- टाईटल : एडिशन: पेपरबैक: कतरा-कतरा आसक्ति
- Title : Edition : E-Book: Katra-Katra Aasakti
- Title : Edition: Paperback: Katra-Katra Aasakti
- Author : Harsh Ranjan
- Publisher : Edition: E-Book/Paperback: Author’s Ink Publications (2018)
- Publisher : Editon: ISBN Edition E-Book: Self Published (2026)
- Language : Hindi
- Print length : 130 + pages
- Poetry Collection
- Versions : E-Book and Paperback
- E-Book & Paperback Edition available on Amazon/Google
Description
‘सूखा हुआ समुद्र’ शीर्षक कविता से उद्धृत:
रोक सको तो रोको
उस चक्के को
जो हर कदमों को
थकाता आ रहा है।
झूठ!
घाटे का सौदा है!
ये पलड़ा गिरता ही
जा रहा है।
ये पूरी जवानी
इश्तिहारो की कहानी रही…
…कभी प्यार की,
कभी वक्त के मार की,
कभी दवाइयों और उपचार की
कभी सपनो के ठेकेदार की।
और जो ढल गयी
वो किसी कंधे पर बैठे
बच्चे की उमंग थी।
झूठ नहीं कहूँगा
मुझे इन चर्चाओ से ज्यादा
वो चिंताएँ पसंद थीं।
आज जब
नजर घुमाता हूँ तो
एक सूखा हुआ समुद्र
नजर आता है।
यहाँ न लहर हैं
ना मछलियां।
एक प्यासे की तबियत से
कह रहा हूँ
निराशा आज ज्यादा है।
बात पुरानी है पीने की
इस रेगिस्तान में
देखने भर का इरादा है।
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