Ahalya (Yatha Gyan)
Description
अहल्या (यथा ज्ञान) की प्रस्तावना से उद्धृत
अहल्या की ये कथा आज भी प्रासंगिक है क्योंकि आज भी कई भोगवादी शक्तियाँ, कई ईर्ष्यालु और कई अतृप्त शक्तियाँ हमारे परिवार की कन्याओं को साम, दाम, दंड, भेद आदि के प्रयोगों से पतित करने का प्रयास करते हैं और छोटी सी गलती के बाद उन्हें पतन के ऐसे दलदल में गिराते हैं कि कोई समाधान नहीं बचता। फिर लंबे पश्चाताप और प्रायश्चित, अनेकानेक दुख और कष्ट और योजनों तक फैले नर्क सा जीवन, शाप और उद्धार! दुखद कथाएँ जो अंत में उसी दिव्य शक्ति से मिलाती हैं जिनसे हम निष्पाप होकर कहीं अधिक सरलता से मिल सकते थे।
कुछ कुतर्कों और थोड़ी सी नासमझी के पीछे ये अथाह दुख क्यों भोगना? ये सत्य हम सब को समझना होगा।
You must be logged in to post a review.






Reviews
There are no reviews yet.