Paschat Mere Hath: पश्चात मेरे हाथ
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ISBN 978-9347629020 (ISBN Edition: E-Book 2026)
- ISBN 9788193650134 (First Published Digitally/Paperback 2018)
- टाईटल : एडिशन: ई-बुक: पश्चात मेरे हाथ
- टाईटल : एडिशन: पेपरबैक: पश्चात मेरे हाथ
- Title : Edition : E-Book: Paschat Mere Hath
- Title : Edition: Paperback: Paschat Mere Hath
- Author : Harsh Ranjan
- Publisher : Edition: E-Book/Paperback: Author’s Ink Publications (2018)
- Publisher : Editon: ISBN Edition E-Book: Self Published (2026)
- Language : Hindi
- Print length : 140 + pages
- Poetry Collection
- Versions : E-Book and Paperback
- E-Book & Paperback Edition available on Amazon/Google
Description
‘उपरांत’ शीर्षक कविता से उद्धृत:
कुछ गुत्थियां उलझी रह गयीं,
कुछ पहेलियां अनसुलझी रह गयीं,
लोगो ने सवाल पूछना ज्यो बंद किया,
सवाल अनकहे हो गये,
नजरें झुकाने की लत लगी और
ज्वार अंदर खो गये…
बाकीं सब कुछ वहीं रहा!
हवाओ मे उलझा आदमी एक
वहीं खड़ा रहा।
शब्दो के जाल में एक कबूतर
वहीं पड़ा रहा!
दो चक्कों को रोककर घोड़ा
वहीं अड़ा रहा।
उस पुराने कमरे को खोला,
कमरे में बंद अरमानो को टटोला
…एक आहट पास आ रही थी।
मैंने पाया
जिसे अंदर बंद किया था
लेकिन
परछाई उसकी
चैखट से दूर जा रही थी।
…और आज
पड़े-पड़े ये व्यथा जगी है
घर की दीवारे राख हो गयीं
और
हवा अब तक सर्द है
वो आग कौन सी लगी है?
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