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Drone : Part 1(Yatha Gyan)

  • ASIN: B0GR69X89L
  • GGKEY: LF69W5SJLF0
  • टाईटल : द्रोण : भाग १ (यथा ज्ञान)
  • Title : Drone : Part 1 (Yatha Gyan),
  • Author : Harsh Ranjan
  • Publisher ‏ : ‎ The Digital Idiots
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length: 156 pages
  • Category:      A Novel,
  • Versions : E-Book
  • Religious Historical Fiction
  • On Amazon/Kindle
  • On Google Books
Category:

Description

द्रोण: भाग १ (यथा ज्ञान) की प्रस्तावना से उद्धृत

होली के महत त्यौहार पर सभी पाठकों को अनेकानेक शुभकामनाएं। अपना नया पौराणिक उपन्यास, ‘द्रोण : प्रथम भाग (यथा ज्ञान)‘ आप पाठकों को अर्पित कर रहा हूँ। कभी के यू ट्यूब विडियो में कहा था कि सब कुछ लिखा जा चुका है…कहीं भी कुछ ऐसा नहीं है जो कि सिद्ध न किया जा सके। ये भी कहा था कि सही को गलत साबित करना बहुत आसान है पर गलत को सही साबित करने से ज्यादा आसान है, सही को सही साबित करना। पौराणिक इतिहास की भूमि में विरोधी विचारधाराओं द्वारा बनाए गए कुछ बंकरों को ध्वस्त करने के प्रयास में अब हमारे सामने था द्रोण प्रकरण। कथा बस उतनी ही है, सब कुछ लिखा और प्रकाशित किया जा चुका है। मैंने इन ऋषियों और अन्य पात्रों का मानवीय रूप और तदनुरूप नाटकीयता जोड़ दी है। भारद्वाज जी का चित्त चंचल होना और फिर पुत्र प्राप्ति के संकेतों से पुत्र प्राप्ति तक, फिर महाराज पृषत से उनकी और द्रुपद और द्रोण की मित्रता दिखानी जरूरी थी। एकाध काल्पनिक प्रसंगों से इस बात को पुष्ट करना था, सो किया। इसके उपरांत युवक द्रोण की अनिश्चितता और उनकी वृति में स्वाभाविक शास्त्र और शस्त्र का द्वंद… भिक्षा न मांगने की उनकी वृति, पृषत के निधन के साथ द्रुपद का सिंहासन पर आरूढ़ होना और फिर भारद्वाज मुनि की स्वर्गारोहण। पूरा क्रम ऐसा ही समझ आया। फिर लिखा भी है कि द्रोण बहुत समय तक तपस्यारत रहे, आश्रम में रहकर तपस्या में बैठे हुए उन्होंने अपनी समस्त पाप-राशि दग्ध कर ली। ये विराग यदि चलता तो संभवतः दैवी प्रयोजन पूरा ही न होता। पुत्र मोह यही कुंजी थी। कदाचित इसी लिए उन्हें भी पुत्र-प्राप्ति की प्रेरणा दी गयी। कुछ कथानक रूढ़ियाँ बहुत काम आती हैं ऐसी ऐतिहासिक कथाओं में। खैर, उनका विवाह कृपाचार्य की बहन कृपी से हुआ था पर मेरी अल्प-बुद्धि इस युवा द्रोण को कृपी तक ला नहीं पा रही थी, इसलिए मैं एक कल्पित चरवाहे का प्रयोग किया…इस शृंखला के पहले भाग में द्रोण का आविर्भाव लिखित है। आप इस पुस्तक को पढ़ें और प्रतीक्षा करें कि अगला भाग शीघ्र ही आएगा!

 

 

 

 

 

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