Aashaadh kee Dupahari: आषाढ़ की दुपहरी
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ISBN 978-9334490824 (ISBN Edition: E-Book 2026)
- GGKEY: TY4TB3Z02U3 /ASIN: B0834BRXYP (First Published Digitally 2019)
- टाईटल: एडिशन: ई-बुक: आषाढ़ की दुपहरी
- टाईटल : एडिशन: पेपरबैक: आषाढ़ की दुपहरी
- Title: Edition: E-Book: Aashaadh Kee Dupahari
- Title : Edition: Paperback: Aashaadh Kee Dupahari
- Author : Harsh Ranjan
- Publisher : Edition: E-Book: Self Published (2019)
- Publisher : Editon: ISBN Edition E-Book: Self Published (2026)
- Language : Hindi
- Print length : 140 + pages
- Poetry Collection
- Versions : E-Book and Paperback
- E-Book & Paperback Edition available on Amazon/Google
Description
‘बचाकर रखना ‘ शीर्षक कविता से उद्धृत:
बेसहारा जब भटकेगा प्यार
तबके लिए कहा है कि
थोडी याद बचाकर रखना,
जिंदगी से इतना ही मिला
कि खुद को कभी नहीं चाहा
तुमने मुझको चाहा हो तो
मेरे लिये थोडी फरियाद बचाकर रखना।
थोडे गम बचाकर रखना,
आँखें नम बचाकर रखना,
जी सको मेरी नायिका सी
इतना दम बचाकर रखना,
हमदम मानना मेरी जान मुझे
मैं संग हूँ तुम्हारे
ये भ्रम बचाकर रखना।
वक्तव्य
आज भी आशा है थोडी!
मरते हुए भी जीने की उम्मीद नहीं छोडी।
तुम अपने आप में पूरी दुनिया हो!
जमीन हो, आसमान हो,
मेरी हसरते हो, मेरा अरमान हो!
कुछ तो तुम्हारे मन में भी बचा होगा,
इतनी जल्दी निशान मिटते नहीं,
हो सकता है कि कई बार
वो हमें दिखते नहीं!
हर जगह देखूँ तुम्हें
बस यही चाह रहा हूँ,
तुम्हारी आँखों में प्यार देखने के लिये
दुनिया घूमकर आ रहा हूँ।
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