Zindagi Zero Mile: ज़िंदगी जीरो माईल
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ISBN 9788193827123 (Edition: 2018: Author’s Ink Publication: Paperback)
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ISBN 9788193827123 (Edition: 2018: Author’s Ink Publication: E-Book)
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टाईटल : एडिशन: ई-बुक: ज़िंदगी ज़ीरो माईल
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टाईटल : एडिशन: पेपरबैक: ज़िंदगी ज़ीरो माईल
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Title : Edition : E-Book: Zindagi Zero Mile
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Title : Edition: Paperback: Zindagi Zero Mile
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Author : Harsh Ranjan
- Publisher : Edition: E-Book: Author’s Ink Publications (2018)
- Publisher : Edition: Paperback: Author’s Ink Publications (2018)
- Language : Hindi
- Print length : 200 + pages
- Story Collection of 10 Stories
- Versions : E-Book and Paperback
- E-Book & Paperback Edition available on Amazon/Google
- Fiction
Description
दो कोने और एक खोज से उद्धृत
-ध्यान से देखो, पहचानते हो?
मेरा इशारा यहाँ की छोटी सी -किंतु बेजान नहीं – इस सड़क की तरफ था …..यहाँ पर चलने वाले लोगों की सीधी-साधी चाल …..सड़क किनारे मंदिर में बज रही घंटियाँ ….सालों से खड़ा बरगद और उस पर लपेटी अनगिनत डोरियाँ….. निश्चल कोमल और पवित्र खिल-खिलाहटें ….अपनी इमानदार हाटें …..यहाँ की भोली-भाली उमंग ….अपने मिट्टी की गंध ….
हम दोनों गंगा के किनारे चले गये।
उमड़ते-घुमड़ते काले-काले मेघ….निश्चल और निर्मल गंगा…दूर तक फैलता कल-कल का स्वर….बहती ठंढ़ी हवाएँ ….तट पर की हलचल….
इस दृश्य ने जैसे हमें बाँध लिया था।
सामने से सावन की धूम-धाम जैसे धीरे-धीरे अपनी ओर बढ़ती आ रही थी।
-ये है अपना उत्सव!- मैंने कहा और आनंद के पास किनारे पर ही बैठ गया।
वह भी काफी देर से स्थिर बैठा, इस दृश्य को देखता रहा। दूर आकाश में काले-काले मेघ छा चुके थे और फिर जोरदार बारिश शुरू हो गयी। मौसम बिल्कुल ठंडा हो गया और चारों ओर सोंधी-सोंधी गंध फैल गयी।
काफी देर की चुप्पी के बाद उसने मुझसे कहा- ऐसा लगता है कि कहीं इन्हीं में खो जाऊँ! …..कहीं मिल जाऊँ ….
आज शायद उसने पहली बार अपने अंधेरे कमरे से निकलकर इस दुनिया को देखा था।
मेरे मन में एक संतोष सा हुआ और आँखों में आँसू आ गये -इसके लिए इन्हें भी तो यहाँ रखना होगा …इसी पवित्रता के साथ …इतनी ही गरिमा से ….
मैं फिर वापस आ गया।
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