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Shakti Ek Ratti

Shakti, Ek Ratti

  • ISBN 9789347629778 (ISBN Edition: E-Book 2026)
  • GGKEY: YTWF5EB3CA / ASIN: B0GNCFVB3Q (First Published Digitally 2026)
  • टाईटल : शक्ति, एक रत्ती
  • Title : Shakti, Ek Ratti
  • Author : Harsh Ranjan
  • Publisher ‏ : ‎ Editon: E-Book: Self Published (2026)
  • Publisher ‏ : ‎ Editon: ISBN Edition E-Book: Self Published Jointly with Author’s Ink (2026)
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length ‏ : ‎ 143 pages almost  
  • Poetry Collection
  • Versions : E-Book
  • On Amazon/Kindle
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Category:

Description

कला का भला हो

 

 

रखवाले का भला है,

वो इंसान भविष्य पर चिंतित है कि

आज संडास के भीतर भी कला है!

कला बोई और उगाई जा रही है,

कला दाल-भात के साथ

खाई जा रही है,

कला ही सातों जन्मों का संबंध है,

दफ्तर से बिस्तर तक सिर्फ कला ही है

जिससे बिना शर्त निभाई जा रही है।

“ये ठीक है क्या?

कला देती है पर

क्या आप राजी हैं,

आज भीख है क्या?”

मुझे लगा कि कला वहीं है,

जहाँ इंसान हैं,

वो इंसान से नहीं,

इंसान उससे भाग्यवान है!

“कलाकार की एक अहर्ता है,

कला नाम का पंछी,

कब ठूँठ पर ठहरता है!”

उसे समझाऊँ कैसे कि

कला ही उसकी अहर्ता है!

कला जड़ से है न कि

फल जो पत्तों में फला करता है!

“हमने इतने फ़िल्टर लगाए,

ये…ये चुनकर आए!”

उसे मालूम है कि

उसके फ़िल्टर ने कला को कम

इंसानों को एक पैमाने पर

ही ज़्यादा छाना है!

उसे कला की गुणवत्ता नहीं,

परिमाण को निबटाना है!

उसका भी कहना सही है,

परिमाण की ही वैल्यू रही है!

कम मिले तो

लोग गोबर भी चाव से खाते हैं,

ज़्यादा मिले तो

खीर भी पिछवाड़े फेंक आते हैं!

तो तय हुआ कि

लोगों के हित है कि

लोगों को कम मिले,

जो भी मिले,

ऊँची दुकान पर ऊँचे दाम पर मिले,

अंधापन हो तभी प्रकाश की पहचान है,

ज़्यादा प्रकाश हो तो फिर,

वही अंधापन परिणाम है!

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