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इंतजार तुम्हारा….zip – 14

Parchhaiyon Ke Peechhe : Sandhya

  • ASIN: B0FLWCYZV2
  • GGKEY: PLFJKE03JJX
  • टाईटल : परछाइयों के पीछे ‘संध्या’
  • Title : Parchhaiyon Ke Peechhe ‘Sandhya’,
  • Author : Harsh Ranjan
  • Publisher ‏ : ‎ The Digital Idiots
  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Print length: 269 pages
  • Fifth Part of A Novel,
  • Versions : E-Book
  • Fiction
  • On Amazon/Kindle
  • On Google Books
Category:

Description

परछाईयों के पीछे ‘संध्या’ से उद्धृत

रवि ने पाया कि एक अजनबी आदमी ने उसके हाथ पर अपनी बेटी का हाथ रखा है। वो हाथ नहीं था, वो एक ज़िम्मेदारी थी। रवि को ये समझना था। ये ठीक है कि बगल में लाल जोड़े में बैठी ये लड़की उसे मोक्ष देने आई थी, उसके लिहाज से कई जिंदगियाँ सँवारने आई थी पर उसने ये भान नहीं किया कि वो भी तो एक जीव थी, उसकी भी एक ज़िंदगी थी। वो लोहे का औज़ार नहीं थी, हो युद्ध का हथियार नहीं थी, वो कोई यान या कि कोई यंत्र नहीं थी, वो एक लड़की थी।

 

 

 

 

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