Parchhaiyon Ke Peechhe : Eeti
Description
परछाईयों के पीछे ‘इति’ से उद्धृत
उसने उन्हें बैठाकर, गाड़ी का दरवाजा बंद किया और गाड़ी आगे बढ़ गयी… एक सुबह की शाम हो चुकी थी, एक बेपरवाह सी लड़की इतनी बड़ी हो गयी कि उसकी ज़िंदगी अनगिनत फर्ज़, पहाड़ जैसे कर्ज़ और जीवनखोर कई मर्जों के नाम हो चुकी थी, जैसा जीने वालों के साथ होता है… वो! एक इंसान…कोई उसके भीतर अंदर ही अंदर रोता है फिर भी सपने सँजोता है…वो गलती से भी मर नहीं सकता… वो सब कुछ भूलता है पर ये नहीं भूलता कि वो क्यों और किसके लिए जीता है, ज़हर भी हो तो भी, क्यों स्वेच्छा से पीता है!
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